वसन्त पञ्चमी 2028
वसन्त पञ्चमी 2028 लेल सटीक तिथि, पूजा मुहूर्त आ शहरक अनुसार समय
मुख्य जानकारी
पर्वक तिथि
Tuesday, February 1, 2028
2028 कें पंचांग संदर्भ
दिन
मंगलवार
विक्रम संवत्
2085
शक संवत्
1950
This year Vasant Panchami falls on a Tuesday, 10 days earlier than 2027 (2027-02-11) — typical lunar-calendar drift.
City-Wise Timings for Vasant Panchami 2028
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| दिल्ली | 7:09 AM | 5:59 PM |
| मुंबई | 7:12 AM | 6:30 PM |
| बेंगलुरु | 6:45 AM | 6:20 PM |
| चेन्नई | 6:35 AM | 6:09 PM |
| कोलकाता | 6:15 AM | 5:24 PM |
| पुणे | 7:08 AM | 6:27 PM |
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वसन्त पञ्चमी 2028 आपकी राशि के लिए क्या लाता है?
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वसन्त पञ्चमी — क्या करें, क्या न करें
धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, एवं समकालीन परम्परा से।
करने योग्य
- Worship Saraswati with yellow flowers, yellow cloth, and a book.
- Wear yellow / yellow-bordered clothing — the festival's defining color.
- Begin teaching a child their first letter (Aksharabhyasa) — most auspicious day.
- Pay your respect to teachers, books, instruments — items associated with Saraswati.
न करें
- Do not place books on the floor or step over them today — even more so than usual.
- Avoid arguments, sarcasm, or harsh words — Saraswati is the karaka of right speech.
- Do not consume meat or alcohol today.
- Do not skip donating a book or musical instrument to a needy student.
वसन्त पञ्चमी 2028 शुभकामनाएँ — साझा करने योग्य संदेश
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Yellow, books, and Saraswati on the desk. Wishing the student in you the courage to ask one harder question this year. Shubh Vasant Panchami.
Spring announces itself. Time to start the thing you said "next year" about last year. Vasant Panchami wishes.
A child's first letter is traditionally written today. Wishing your home the joy of beginnings.
Saraswati doesn't care what you do for a living — she cares whether you are still learning. Wishing you a Vasant Panchami of fresh notebooks.
Yellow turmeric on the desk, a thread tied around the wrist, a stotra recited. Vasant Panchami is the festival of the threshold.
वसन्त पञ्चमी वर्षों में — २०२०-२०३०
पिछले एवं भविष्य के वर्षों की तिथियाँ — एक स्थान पर।
ई तिथि किएक?
Vasant Panchami follows the Udaya Tithi rule – the festival is observed on the day when the required tithi prevails at sunrise. This is the default Dharmasindhu convention for festivals without a special time-window requirement.
पूजा विधि
आवश्यक सामग्री
- सरस्वती केर मूर्ति वा चित्र
- उज्जर फूल (विशेष रूप सँ उज्जर कमल)
- पीयर फूल (गेंदा, सरसोक फूल)
- पोथी (आशीर्वादक लेल)
- कलम, पेन्सिल वा लिखबाक उपकरण
पूजाक चरण
- 1
पीयर वस्त्र धारण करू आ तैयारी
भोर मे उठू, स्नान करू आ पीयर वस्त्र पहिरू – पीयर रङ्ग वसन्त मे फूलल सरसोक खेतक प्रतीक अछि आ वसन्ती पञ्चमीक लेल सरस्वतीक ...
- 2
सरस्वती वेदी सज्जा
सरस्वतीक मूर्ति/चित्र केँ उज्जर वस्त्र पर पूब दिस मुँह कयने राखू। मूर्ति केर सोझाँ पोथी, लिखबाक सामग्री आ वाद्ययंत्र राख...
- 3
आचमन आ सङ्कल्प
आचमन करू (शुद्धिकरण लेल तीन बेर जल ग्रहण करू)। तखन दाहिना हाथ मे पीयर अक्षत आ जल लिय, सरस्वती पूजाक तिथि, स्थान आ उद्देश...
फल (लाभ)
देवी सरस्वतीक आशीर्वाद ज्ञान, बुद्धि, वाक्पटुता, कला आ संगीतमे निपुणता, शिक्षा आ परीक्षा मे सफलता, विचार आ वाणीमे स्पष्टता, रचनात्मक प्रेरणा, आ अज्ञानता (जाड्य) कें दूर करबाक लेल।
देवता
सरस्वती
कथा आ इतिहास
वसन्त पञ्चमी — माघ शुक्ल पञ्चमी — लम्बा शीत कें बाद वसन्त कें आगमन कें पर्व अछि। पूरा कथा पढू →कम देखाबू ↑
वसन्त पञ्चमी — माघ शुक्ल पञ्चमी — लम्बा शीत कें बाद वसन्त कें आगमन कें पर्व अछि।
ब्रह्म पुराण कें अनुसार ब्रह्मा सृष्टि बना कय देखलनि जे ओ रूप मे पूर्ण मुदा पूर्णतया मौन छल। ब्रह्मा विष्णु सँ पुछलनि; विष्णु वाणी कें देवी कें आह्वान कें अनुमति देलखिन्ह। ब्रह्मा कें मुख सँ सरस्वती प्रकट भेलि — गोर, श्वेत वस्त्र, हंस पर बैसल, दू हाथ मे वीणा, अन्य दू मे पुस्तक आ अक्षमाला। हुनकर वीणा सँ सा-रि-ग कें नाद निकलल आ जगत भरि गेल।
दोसर परम्परा देवी भागवत सँ — सरस्वती त्रिवेणी सङ्गम पर प्रकट भेलथि। तेसर परम्परा ब्रह्मवैवर्त सँ — ब्रह्मा पुत्रीत्व पहचानि कय संयम कयलनि, विष्णु सँ वर पाओलनि जे सरस्वती कें पूजा पुत्री जकाँ हो।
पीला सब ठाँ — हरिद्र, सरसो कें फूल, पीली साड़ी, पीला भात, पीला मिठाइ। पीला वसन्त कें रङ्ग।
बङ्गाल मे सरस्वती पूजा — मुख्य विद्यालय कें पर्व। बच्चा कें कच्चा चाउर पर औंगुर सँ अक्षर लिखाओल जाइत अछि।
कनाय पालन करब
देवी सरस्वती की पीले फूलों और मिठाइयों से पूजा करें। पीले वस्त्र पहनें। नई शिक्षा या सृजनात्मक कार्य आरम्भ करें। बच्चों का विद्यारम्भ संस्कार इस दिन किया जाता है।
महत्व
वसन्त ऋतु के आगमन का प्रतीक। शिक्षा, संगीत और कला आरम्भ करने का सबसे शुभ दिन।
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