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धनु लग्न (संस्कृतमे Dhanu Lagna) वैदिक ज्योतिषक बारह लग्नमे नवम थिक। अहाँक लग्न राशि ओ नक्षत्र-समूह थिक जे अहाँक जन्मक समय पूर्वी क्षितिज पर उदित छल। ई अहाँक सम्पूर्ण कुण्डलीक ढाँचा निर्धारित करैत अछि — कोन ग्रह कोन भावक स्वामी अछि, कोन दशा कखन सक्रिय होइत अछि, आ अहाँक स्वाभाविक प्रवृत्ति की अछि। अहाँक लग्नेश बृहस्पति क संग, अग्नि तत्व अहाँक स्वभावकेँ नियन्त्रित करैत अछि आ द्विस्वभाव प्रकृति अहाँक परिवर्तनक प्रति दृष्टिकोणकेँ आकार दैत अछि।
आशावादी, दार्शनिक आ साहसिक। स्वाभाविक शिक्षक आ अन्वेषक, सदा उच्चतर अर्थ कें खोज। अहाँक उत्साह सङ्क्रामक आ दृष्टि विस्तृत। पैघ चित्र देखैत छी मुदा विवरण चूकि सकैत छी। अति-वचन आ युक्ति-रहित सत्यवादिता अहाँक छाया अछि।
शिक्षा, कानून, प्रकाशन, यात्रा, दर्शन, धर्म, अन्तरराष्ट्रीय व्यापार आ उच्च-शिक्षा। कैरियरमे स्वतन्त्रता आ विस्तार आवश्यक। शिक्षण, उपदेश आ आन कें मार्गदर्शन सन्तुष्टि दैत अछि। दीर्घ-दूरी व्यापार आ विदेशी सम्बन्ध लाभदायक।
कूल्हा, जाँघ, यकृत आ साइटिक-तन्त्रिका पर ध्यान। भोजन, पेय आ भोगमे अति-यकृत स्वास्थ्यकेँ प्रभावित करैत अछि। सक्रिय बाह्य जीवन औषधि अछि — पदयात्रा, अश्वारोहण, खेल। अहाँक आशावाद उपचारमे सहायक मुदा लक्षणकेँ अनदेखा क' सकैत छी।
सम्बन्धमे स्वतन्त्रता-प्रेमी। समान रूपसँ साहसिक आ बौद्धिक उत्तेजना दय वाला साथीक आवश्यकता। दीर्घ-दूरीक सम्बन्ध सम्भव। विवाह विलम्बसँ वा भिन्न संस्कृतिक व्यक्तिसँ भ' सकैत अछि। निष्ठाक लेल सचेत प्रयास आवश्यक।
शिक्षा, कानून, प्रकाशन आ अन्तरराष्ट्रीय उद्यमसँ धन। अति-उदार — आवश्यकतासँ बेसी द' सकैत छी। सट्टा आ दीर्घकालिक निवेशमे भाग्यशाली। यात्रा आ अन्तर-सांस्कृतिक अनुभवसँ आर्थिक प्रज्ञा अबैत अछि।
स्वाभाविक आध्यात्मिक साधक। तीर्थयात्रा, शास्त्र-अध्ययन आ दार्शनिक अन्वेषण। बृहस्पति-पूजा आ गुरु-भक्ति शीघ्र आध्यात्मिक विकास दैत अछि। वेदान्त, बौद्ध-धर्म आ सार्वभौमिक आध्यात्मिकता आकर्षित करैत अछि। अहाँ आध्यात्मिक शिक्षक बनि सकैत छी।
प्रत्येक ग्रहक एकटा उच्च राशि (जतय ओ सर्वोत्तम फल दैत अछि) आ एकटा नीच राशि (जतय ओ दुर्बल होइत अछि) होइत अछि। अहाँक कुण्डलीमे लग्नक अनुसार ई भाव बदलैत अछि।
बृहस्पति धनु राशिक स्वामी हेबाक नाते अहाँक प्रथम भाव (लग्न) क स्वामी अछि। अहाँक जन्म कुण्डलीमे बृहस्पति क स्थिति — ओकर राशि, भाव, दृष्टि आ युति — अहाँक सम्पूर्ण जीवन-दिशा, जीवनी-शक्ति आ पहचान पर निर्णायक प्रभाव डालैत अछि। यदि बृहस्पति स्वराशि, मूलत्रिकोण, उच्च वा मित्र राशिमे बलवान होय, तँ अहाँक धनु लग्नक आधारभूत प्रतिज्ञा सहजतासँ प्रकट होइत अछि। यदि बृहस्पति दुर्बल वा पीड़ित होय, तँ अहाँक स्वाभाविक शक्तिक प्रकटनमे बाधा अबैत अछि — जे विशिष्ट उपायक दिस सङ्केत करैत अछि।
प्रथम भावक अतिरिक्त, बृहस्पति स्वाभाविक रूपसँ अहाँक कुण्डलीमे चौथा भावक विषयक सेहो अधिपति अछि।
अपन पूर्ण कुण्डली बनाउ आ देखू जे धनु वास्तवमे अहाँक लग्न अछि किनै, बृहस्पति अहाँक कुण्डलीमे कतय स्थित अछि, आ ई स्थितिसँ कोन योग सक्रिय होइत अछि। निःशुल्क, बिना साइनअप, स्विस एफेमेरिस सटीकता।
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