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पारिजातयोगः
निर्माण नियम
लग्न स्वामीक स्वामी अपन/उच्च राशि मे केन्द्र/त्रिकोण मे
उदाहरण कुण्डली
मेष लग्न उदाहरण — वास्तविक स्थिति भिन्न हो सकती है
पारिजात (दिव्य वृक्ष) योग आयुक संग बढ़ैत सुख प्रदान करैत अछि, जेना पौराणिक कल्पतरु। ग्रह-स्वामियक सुदृढ़ श्रृंखला संयुक्त गरिमा उत्पन्न करैत अछि।
वर्धमान सुख
आयुक संग बढ़ैत सुख, संयुक्त आशीर्वाद।
पारिजात योगवला व्यक्ति सभ प्रायः अहन जीवनक अनुभव करैत छथि जतय सन्तुष्टि आ समृद्धि निरन्तर बढ़ैत रहैत अछि, विशेषतः युवावस्थाक प्रारम्भिक कालक बाद। ओ सभ स्थिर आधार बनाबैक प्रवृत्ति रखैत छथि, अपन प्रयास सभक परिणाम समयक संग उत्तरोत्तर सकारात्मक होइत देखैत छथि। ई बादमे विकसित होमयवला करियरक रूपमे प्रकट भऽ सकैत अछि, वा परिपक्वताक संग गहीर आ अधिक सन्तोषजनक सम्बन्धक रूपमे, जे गहीर कल्याणक भावना दिस अग्रसर करैत अछि।
योगक प्रभाव सामान्यतः लग्न स्वामी वा ओकर डिस्पोजिटरक दशा वा अन्तर्दशा कालमे सक्रिय होइत अछि। ई काल प्रायः बढ़ती प्रसन्नता आ भौतिक लाभक महत्वपूर्ण चरण सभकेँ चिह्नित करैत अछि।